पेट तथा श्वसन रोगों में फायदेमंद है मत्स्यासन योग, जाने अन्य फायदे

आजकल के लोगों की जीवनशैली व्यस्तता से भरी हुई है| नौकरी पेशा लोग ना ही व्यायाम के लिए समय निकाल पाते है और ना ही ठीक तरह का आहार लेते है| ऐसे में पेट सम्बन्धी परेशानी होना आम बात है| यदि आपको पाचन संबंधी समस्याए रहती है तो आपका स्वास्थ्य ख़राब ही रहता है| इसलिए अगर आप स्वस्थ जीवनशैली जीना चाहते है तो आपके पाचन का दुरुस्त रहना जरुरी है|

शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाने में योग अहम भूमिका निभाता है| योग आसनो में मत्स्यासन करने से पेट से जुडी समस्याए दूर होती है| इससे पाचन क्रिया सुधरती है| यह एकमात्र ऐसा आसन है, जिसके अभ्यास से अनेक बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। यदि आप इस आसन का अभ्यास सर्वांगासन के बाद करते है तो दोनों आसनों का लाभ दोगुना हो जाता है।

मत्स्यासन दो शब्दों के मेल से बना है| पहला मत्स्य और दूसरा आसन| मत्स्य का अर्थ होता है मछली। इस आसन को करते वक्त शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, इसलिए ही इसका नाम मत्स्यासन रखा गया है| इस आसन को करने से सेहत और सौंदर्य दोनों में फायदा मिलता है| आइये विस्तार से जानते है Matsyasana in Hindi.
 

Matsyasana in Hindi:  जानिए मत्स्यासन के लाभ, विधि और सावधानियाँ

 

 

मत्स्यासन करने की विधि:-

यह छाती को चौड़ा करने वाला एक आसन है| इस आसन को अंग्रेजी में फिश पोज़ के नाम से जाना जाता है| इस आसन का नाम संस्कृत के शब्द मत्स्य से लिया गया है| आइये जानते है Matsyasana Steps in Hindi.

मत्स्यासन को करने के लिए सबसे पहले किसी समतल जगह पर दरी बिछा लीजिए| अब पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएँ। यहाँ देखे पद्मासन करने का तरीका| अब बैठने के बाद सावधानीपूर्वक पीछे की ओर चकित होकर लेते। लेटते समय इस बात का ध्यान रहे क‍ि लेटते समय आपके दोनों घुटने जमीन से ही सटे हुए हो।

अब अपने दोनों हाथों की हथेलियों की मदद से सिर और गर्दन को उठाये और सिर के अगले हिस्से को भूमि पर टिकाएँ। इसके पश्चात अपने दोनों हाथों को नितम्बों के दोनों ओर जमीन पर रखें। अपने शरीर को संतुलित करने की कोशिश करे और सांस स्वाभाविक रूप से लें। अब अपने दोनों हाथों की मदद से पैर के अंगूठे को पकड़ लें। बाएं हाथ से दाएं पैर के अंगूठे को व दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ लें।

इस अवस्था में आपकी पीठ ऊपर उठी हुई होनी चाहिए और दोनों कोहनियों को जमीन पर लगाकर रखें। इस मुद्रा में कम से कम 10 से 15 सैकेंड तक रहें, फिर धीरे-धीरे अभ्यास का समय बढ़ाते हुए 3 मिनट तक लें जाएं। आसन पूर्ण होने के पश्चात पहले अंगूठे को छोड़े फिर कमर को सीधा कर पद्मासन को खोलकर अपने दोनों पैरों को फैला लें और कुछ देर तक लेटे रहें। पूरी क्रिया को आराम से करे, इसे करने के लिए जल्दीबाजी ना करे|
 

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Matsyasana Benefits in Hindi: मत्स्यासन से मिलने वाले लाभ

  1. मत्स्यासन को करने से सांस के सभी रोगों से राहत मिलती है|
  2. इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है तथा रीढ़ की हड्डियों के विकार दूर होते है|
  3. यह पेट के समस्त रोग ठीक करता है जैसे अपच, कब्ज, वायु विकार आदि| यह भूख को भी बढ़ाता है।
  4. यह आसन शरीर में शुद्ध खून का निर्माण एवं संचार करता है| इसलिए इससे चेहरे पर चमक आती है।
  5. यह आसन नियमित करते रहने से दमा रोग ठीक होता है और श्वासनली की सूजन दूर होती है|
  6. इससे थायरायड एवं पैराथायरायड ग्रंथियों को भी लाभ मिलता है| यह खांसी व टॉंसिल में भी लाभकारी है।
  7. इस आसन के द्वारा ग्रीवा की कशेरूका और मांसपेशियां आगे-पीछे खिंचने से लचीली व मजबूत बनती है|
  8. इससे मासिकधर्म सही समय पर आता है, यह आसन स्त्रियों के गर्भाशय संबंधी सभी बीमारियों को जल्द ठीक करता है|
  9. जिन लोगो को कमर दर्द रहता है उन लोगो को यह आसन जरूर करना चाहिए| इस आसन से गर्दन पर जमी चर्बी दूर होती है|
  10. यह आसन चेहरे के तंतुओं पर विशेष प्रभाव डालता है यह पूरे मेरूदंड को प्रभावित कर उसकी गड़बड़ियों को दूर करता है।
  11. मत्स्यासन का अभ्यास पेट की मांसपेशियों को क्रियाशील बनाता है| इससे छोटी आंत तथा मलद्वार भी सही रूप से काम करने लगता है।
  ऊपर आपने जाना Matsyasana in Hindi. यदि आप भी उपरोक्त लाभ चाहते है तो मत्स्यासन को जरूर अपनाए| किन्तु यदि आपको इसे करने पर छाती या गले में अत्यधिक दर्द हो रहा हो या आपको कोई भी रोग हो तो उस स्तिथि में यह आसन न करें।

इसके अतरिक्त इस आसन को बड़ी सावधानी के साथ करना चाहिए, इसे शीघ्रता से करने पर गर्दन में मोच आ जाने का भय रहता है| यह आसन को एक मिनट से पाँच मिनट तक किया जा सकता है।