अनेकों बीमारी को दूर करने में मददगार है तिल

भारतीय खानपान में तिल का बहुत महत्‍व है। सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर सक्रिय रहता है। सर्दियों के मौसम में तिल के तेल की मालिश करने से ठंड से बचाव होता है। तिल और मिश्री का काढ़ा बनाकर खांसी में पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है। इसी तरह से अगर किसी को बिच्छू ने काट लिया हो तो तिल के पत्ते को पीसकर डंक वाले स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

तिल में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्‍प्‍लेक्‍स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्‍व पाये जाते हैं। तिल का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती। इसके अलावा प्राचीन समय से खूबसूरती बनाये रखने के लिए भी तिल का प्रयोग किया जाता रहा है। तिल तीन प्रकार के होते हैं - काले, सफेद और लाल। लाल तिल का प्रयोग कम किया जाता है। तिल का तेल भी बहुत फायदेमंद होता है।
 
 
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जानिए तिल के बेमिसाल फायदे और रहिये स्वस्थ

    आइए हम आपको तिल के औषधीय गुणों के बारे में आपको बताते हैं।
मानसिक दुर्बलता दूर करें:-
तिल के तेल को बुद्धिवर्धक भी कहा जाता है। तिल में प्रोटीन, कैल्शियम और बी कॉम्प्लेक्स बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्रतिदिन लगभग पचास ग्राम तिल खाने से कैल्शियम की आवश्यकता पूरी होती है। तिल के सेवन से मानसिक दुर्बलता एवं तनाव दूर होता है।
ब्‍लड सर्कुलेशन को सही रखे:-
तिल का तेल गाढ़ा होने के कारण इससे मालिश करने पर यह तेल त्‍वचा में आसानी से मिल जाता है। जिससे यह त्‍वचा को अंदर से पोषण मिलती है। तिल से बने तेल से नियमित मालिश करने से ब्‍लड सर्कुलेशन की प्रक्रिया सही रहती है और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत होती है।
मुँहासों से मुक्‍ती:-
मुँहासे होने पर चेहरे पर तिल को पीसकर मक्‍खन के साथ मिलाकर लगाने से चेहरे के कील मुँहासे भी समाप्त होते है। इससे आपकी त्वचा पर हुए दाग धब्बे के निशान जल्द ही ठीक हो जायेगे।
कमर और पीठ दर्द सही करे:-
यदि कमर और पीठ में दर्द होता है तो हींग और सौंठ डाल कर गरम किये हुए तिल के तेल से मालिश करें। इससे आपको कमर और पीठ दर्द नहीं होगा।
एंटी-बैक्टीरियल है तिल:-
तिल में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण यह किसी भी तरह के घाव को जल्द ही ठीक कर देता है। इसके अलावा किसी भी सूजन में आराम देता है और सोराइसिस और एक्जिमा जैसी त्वचा की परेशानियों को दूर करने में भी मदद करता है। इसके अलावा जलने पर भी तिल का प्रयोग किया जाता है। जले हुए स्‍थान पर देशी घी और कपूर के साथ मिलाकर जले हुए स्‍थान पर इसका लेप लगाने से फायदा होता है।
बच्‍चे का बिस्‍तर पर पेशाब करना होगा बंद:-
कई बच्‍चों को बिस्‍तर पर पेशाब करने की आदत होती है। इसके लिये 50 ग्राम तिल का तेल और 200 ग्राम गुड़ मिलाएं और सुबह-शाम 5 से 10 ग्राम बच्‍चे को कुछ दिनों के लिये दीजिये। इससे बहुत आराम मिलेगा।
खूनी बवासीर में लाभ:-
खूनी बवासीर में खून बंद करने के लिये दस ग्राम काले तिल को पानी के साथ पीस कर इसमें एक चम्‍मच मक्‍खन मिला कर चाटें। इसमें चाहें तो मिश्री भी मिला सकते हैं ओर सुबह-शाम खा सकते हैं।