Vatsanabha: विभिन्न रोगों के उपचार में मदद करे, जानिए उपयोग का तरीका

वत्सनाभ को अन्य नामो से भी जाना जाता है जैसे कि अतीस, एकोनिट, एकोनिटम फेरोक्स, बच्छनाभ, विषा, अतिविषा आदि। वत्सनाभ के पौधे सिक्किम से लेकर उत्तर पश्चिम हिमालय तक समुद्र तल से 10,000 से 15,000 फुट की ऊंचाई तक पाए जाते है।

वत्सनाभ विषैली तथा विषरहित दोनों तरह की होती है। यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है जिसमे एकोनाइट एवं स्यूडोएकोनाइटिन नामक जहरीला तत्व होता है। इसके विषैले पौधे के फूलों को सूंघने से ही मनुष्य बेहोश हो जाता है।

सबसे ज्यादा विष इसकी जड़ में होता है। दो तरह के वत्सनाभ होते है एक काला और दूसरा सफ़ेद। वत्सनाभ का प्राकृतिक रंग पीला धूसर होता है इसकी खास बात होती है कि इसके नजदीक दूसरे पेड़ नही लगते हैं ।

वत्सनाभ के फूलों का रंग बैंगनी-नीला से लेकर पीला और सफेद होता है, कुछ फूल द्विरंगी भी होते हैं। वत्सनाभ का उपयोग आयुर्वेदिक दवा के रूप में किया जाता है। जानते है Vatsanabha के अन्य फायदे के बारे में।

Vatsanabha in Hindi: वत्सनाभ के गुणों के बारे में जानिए

शरीर के सभी अंगों का दर्द मिटाने के लिए

  • वत्सनाभ के तेल से सभी प्रकार के दर्द को खत्म किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसके लेप को गठिया और छोटे जोड़ों की सूजन पर लगाने से लाभ होता है।
  • साइटिका, गठिया (घुटने के दर्द), धनुर्वात (शरीर का टेढ़ा हो जाना) में भी इसको बहुत ही कम मात्रा में देने से यह फ़ायदेमंद होता है।

पेशाब का बार-बार आना

  • जिस भी व्यक्ति को मूत्र न रुकता या इसे त्यागते वक्त कष्ट होता हो उसको आधे चावल के बराबर वत्सनाभ का सेवन करना चाहिए।

बुखार में सहायक

  • बार बार आने वाले बुखार को ठीक करने के लिए गंधक, सोहागा, दालचीनी और दूसरी चटपटी सुगंधित चीजों के साथ, वत्सनाभ आधे चावल के बराबर की मात्रा में देने से बुखार सही हो जाता है।
  • ठंड लगकर आने वाले बुखार में वत्सनाभ को थोड़ी मात्रा में देने से राहत मिल जाती है।
  • घाव, सूजन और बुखार में शुद्ध हींग, शुद्ध सुहागा, शुद्ध वत्सनाभ, निर्गुण्डी का रस, नागदंती इन सब चीजों को बराबर मात्रा में लें और अच्छी तरह से पीसकर 65-65 मिलीग्राम की गोलियां बना लें।
  • इन गोलियों में से 1-1 गोली रोजाना सुबह-शाम लेने से राहत मिलती है।

दमा जैसे रोगो के लिए

  • काली हरड 20 ग्राम , पीपल 10 ग्राम, चित्रक 20 ग्राम और शुद्ध वत्सनाभ 5 ग्राम पीसकर गाय के घी में मिला ले और इसका मिश्रण बना ले।
  • इसको शहद से 2 से 3 ग्राम की मात्रा में देने पर दमा जैसे रोगों में फायदा मिलता है।

मधुमेह, कुष्ठ रोग में उपयोगी

  • 70 ग्राम अखरोट में 10 ग्राम शुद्ध बछनाग को मिला लें और फिर उसमें से करीब 1 ग्राम का चौथा भाग तक की मात्रा में रोगी को 3 दिनों तक दें।
  • इससे कुष्ठ रोग, भयातिसार (भय के कारण दस्त लगना), पक्षाघात (लकवा) और मधुमेह आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।
  • इसके अतिरिक्त यह बिच्छू का विष, सूजन, टांसिल, ख़ासी को भी दूर करने में मदद करता है।

नोट: वत्सनाभ को अधिक मात्रा में लेने से मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए यदि आप इसका प्रयोग करना चाहते है तो आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह ज़रूर ले।